चूल्हा दीन्हो बारि, नातो रह्यो सो जरि गयो।रहिमन उतरे पार, भार झोंकि सब भार में॥४॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
बिन्दु में सिन्धु समान, को कासों अचरज कहैरहीमकविताबिन्दु में सिन्धु समान, को कासों अचरज कहैरहीम२ मिनट का पाठ