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मीत पुरातन बाम्हन दीन कों

सवैया · लगभग २ मिनट
मीत पुरातन बाम्हन दीन कों देखि मिल्यौ हसि दूर तें ज्यौं ही।धूरि भरे पग धोए दयौ निजु आसन बैठि गए ढिग भौंही।तीन मुठी भखि तंदुल तीन हूँ लोक-विभौ दई चौथी को त्यौं ही।हाथ गह्यौ हरि को हरि-वामा सुदामा को दीबे रही अब हौं ही॥

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