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हाशिया
कविता
सुन्दर प्रभुजी पेट बसि, चौरासी लख जंत
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
सुन्दर प्रभुजी पेट बसि, चौरासी लख जंत।
जल थल कै चाहै सकल, जे आकाश बसंत॥
॥
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सुन्दर वाही बोलिवौ, जा बोलै में ढंग
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