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सुन्दर प्रभुजी पेट बसि, चौरासी लख जंत

दोहा · लगभग २ मिनट
सुन्दर प्रभुजी पेट बसि, चौरासी लख जंत।जल थल कै चाहै सकल, जे आकाश बसंत॥

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