धन्य श्री यमुने निधि दैनहारी।करत गुनगान, अज्ञात अघ दूरि करि,जाय मिलवत प्रिय प्राणप्यारी॥जनि कोउ संदेह करौ, बात चित में धरौ,पुष्टिपथ अनुसरौ, सुख जु कारी॥प्रेम के पुंज में, रास-रस कुंज में,तहां राखत रस-रंग भारी॥श्री जमुने और प्रानपति, प्रान अरु प्रानसुखचहूं जीव-जीव पर दया बिचारी॥छीतस्वामी गिरिधरन श्री विठ्ठल,प्रीति के लैं अब संगधारी॥

धन्य श्री यमुने निधि दैनहारी
छीतस्वामीपद · लगभग २ मिनट