मुख्य पाठ पर जाएँ
लेखक, शीर्षक, विधा, संग्रह या पाठ खोजें
Roman में लिखें, हिंदी सुझाव चुनें।
मेरी सूची
पढ़ना शुरू करें
लेखक, शीर्षक, विधा, संग्रह या पाठ खोजें
Roman में लिखें, हिंदी सुझाव चुनें।
खोजें और पढ़ें
कहानियाँ
कविताएँ
उपन्यास
निबंध
रस से पढ़ें
लेखक
संग्रह
हाशिया
कविता
कौतिक दीठा देह विन, रवि खसि विना उजास
कबीर
साखी · लगभग २ मिनट
कौतिक दीठा देह विन, रवि खसि विना उजास।
साहिब सेवा माहिं है, बेपरवाही दास॥२॥
॥
साझा करें
सहेजें
अ−
अ+
पिछला
कौण देस कहाँ आइया, कहु क्यूॅ जांणयां जाई
अगला
खंभा एक गइंद दोइ, क्यूं करि वंधिसि बारि
अब कुछ और पढ़ें
सुख माँगत दुख आगै आवै
कबीर
कविता
सुख माँगत दुख आगै आवै
कबीर
२ मिनट का पाठ
हम मसकीन खुदाई बंदे तुम राचसु मन भावै
कबीर
कविता
हम मसकीन खुदाई बंदे तुम राचसु मन भावै
कबीर
२ मिनट का पाठ
सनक आनंद अंत नहीं पाया
कबीर
कविता
सनक आनंद अंत नहीं पाया
कबीर
२ मिनट का पाठ