मेरी सूचीपढ़ना शुरू करें

अटपट रंग को बिरह सुनि

पद · लगभग २ मिनट
अटपट रंग को बिरह सुनि, भूलि रहे सब कोइ।जल पीवत हैं प्यास कों, प्यास भयौ जल सोइ॥‘हित ध्रुव’ दुरलभ सबनि तें, नित्यबिहार सरूप।ललितादिक निज सहचरी, सो सुख लहति अनूप॥

अब कुछ और पढ़ें