श्री राधाबल्लभ लाड़िली, अति उदार सुकुमारि।ध्रुव तौ भूल्यौ और तें, तुम जिनि देहु बिसारि॥तुम जिनि देहु बिसारि, ठौर भोकों कहुँ नाहीं।पिय-रंग भीर कटाक्ष, नेक चितवो भौ माहीं॥बढ़ै प्रीति की रीति बीच, कछु होइ न बाधा।तुम हो परम प्रवीन, प्राण बल्लभ श्री राधा॥

श्री राधाबल्लभ लाड़िली
ध्रुवदासकुंडली · लगभग २ मिनट