सतसंगति मगन पाइये।गुर परसादे राम गाइये॥आकास धरनि धरीजै धरनी आकास कीजै।सुन्नि माहैं निरखि लीजै॥निरखि मुकताहल माहैं साइर आयौ।अपने पीया हौं धावत खोजत पायौ॥सोच साइर अगोचर लहिये।देव देहरे माहैं कौन कहिये॥हरि कौ हितारथ ऐसौ लखै न कोई।दादू जे पीव पावै अमर होई॥

