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हाशिया
कविता
भूतनि मंहिं मिल रह्यौ, तातें हूवौ भूत
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
भूतनि मंहिं मिल रह्यौ, तातें हूवौ भूत।
सुन्दर भूलौ आपु कौ, उरझ्यौ नौ मन सूत॥
॥
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सुन्दर देह हलै चलै, चेतनि कै संजोग
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चम्बक सत्ता कर जथा, लोहा नृत्य कराइ
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तैं दिन च्यारि बिराम लियौ
सुंदरदास
कविता
तैं दिन च्यारि बिराम लियौ
सुंदरदास
२ मिनट का पाठ
तात मिलै पुनि मात मिलै
सुंदरदास
कविता
तात मिलै पुनि मात मिलै
सुंदरदास
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जग मग पग तजि सजि भजि राम नाम
सुंदरदास
कविता
जग मग पग तजि सजि भजि राम नाम
सुंदरदास
२ मिनट का पाठ