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राम ऐसो ही जांनि जपी नरहरी

पद · लगभग २ मिनट
राम ऐसो ही जांनि जपी नरहरी,माधव मदसूदन बनवारी॥ टेक॥अनुदिन ग्यान कथै घरियार, धूवं धौलह रहै संसार।जैसे नदी नाव करि संग, ऐसै ही मात पिता सुत अंग॥सबहि नल दुल मलफ लकीर, जल बुदबुदा ऐसा आहि सरीर।जिभ्या राम नाम अभ्यास, कहौ कबीर तजि गरम बास॥374॥

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