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तों सों प्रभु जो पै कहुँ कोउ होतो

पद · लगभग २ मिनट
तों सों प्रभु जो पै कहुँ कोउ होतो ।तो सहि निपट निरादर निसिदिन, रटि लटि ऐसो घटि को तो ॥ १ ॥कृपा-सुधा-जलदान माँगिबो कहाँ सो साँच निसोतो ।स्वाति-सनेह-सलिल-सुख चाहत चित-चातक सो पोतो ॥ २ ॥काल-करम-बस मन कुमनोरथ कबहुँ कबहुँ कुछ भो तो ।ज्यों मुदमय बसि मीन बारि तजि उछरि भभरि लेत गोतो ॥ ३ ॥जितो दुराव दासतुलसी उर क्यों कहि आवत ओतो ।तेरे राज राय दसरथके, लयो बयो बिनु जोतो ॥ ४ ॥

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