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अंगनि अंग मिलाय दोऊ

सवैया · लगभग २ मिनट
अंगनि अंग मिलाय दोऊ रसखानि रहे लपटे तरु छाँहीं।संग निसंग अनंग को रंग सुरंग सनी पिय दै गल बाँहीं॥बैन ज्यों मैन सु ऐन सनेह कों लूटि रहे रति अंतर जाहीं।नीबी गहै कुच कंचन कुंभ कहै बनिता पिय नाहीं जू ना नाहीं॥

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