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हाशिया
कविता
छूट्यो लाज गरिअवा, औ कुल-कानि
रहीम
बरवै · लगभग २ मिनट
शठ
छूट्यो लाज गरिअवा, औ कुल-कानि।
करत रोज अपरधवा, परि गइ बानि॥१११॥
॥
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छीन, मलिन, विष-भइया, औगुन तीन
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जंघन जोरति गोरिआ, करति कठोर
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गई आगि उर लाय, आगि लैन आई जु तिय
रहीम
कविता
गई आगि उर लाय, आगि लैन आई जु तिय
रहीम
२ मिनट का पाठ
रहिमन जग की रीति, मैं देखा रस ऊख मैं
रहीम
कविता
रहिमन जग की रीति, मैं देखा रस ऊख मैं
रहीम
२ मिनट का पाठ
दीपक हिए छिपाइ, नवल बधू घर लै चली
रहीम
कविता
दीपक हिए छिपाइ, नवल बधू घर लै चली
रहीम
२ मिनट का पाठ