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रहिमन कुटिल कुल्हार ज्यों, कै डारै दुइ टूक

दोहा · लगभग २ मिनट
रहिमन कुटिल कुल्हार ज्यों, कै डारै दुइ टूक।चतुरन के कलकत रहै, चूक समै की हूक॥१९५॥

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