रहिमन कुटिल कुल्हार ज्यों, कै डारै दुइ टूक।चतुरन के कलकत रहै, चूक समै की हूक॥१९५॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
चूल्हा दीन्हो बारि, नातो रह्यो सो जरि गयोरहीमकविताचूल्हा दीन्हो बारि, नातो रह्यो सो जरि गयोरहीम२ मिनट का पाठ