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हाशिया
कविता
बिगरी बात बनै नहीं, लाख करौ किन कोइ
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
बिगरी बात बनै नहीं, लाख करौ किन कोइ।
रहिमन बिगरे दूध के, मथे न माखन होइ॥१२२॥
॥
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बाँकी चितवनि चित गड़ी, सूधी तौ कछु धीम
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बिपति भए धन ना रहै, होइ जो लाख करोर
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दीपक हिए छिपाइ, नवल बधू घर लै चली
रहीम
कविता
दीपक हिए छिपाइ, नवल बधू घर लै चली
रहीम
२ मिनट का पाठ
होइ कत कारि बदरिआ, बरखत पाथ
रहीम
कविता
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रहीम
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रहीम के दोहे
रहीम
कविता
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रहीम
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