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मैमंता मन मारि रे, घटहीं मांहै घेरि

साखी · लगभग २ मिनट
मैमंता मन मारि रे, घटहीं मांहै घेरि।जबहीं चालै पीठि दे, अंकुस दे दे फेरि ॥१९॥

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