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हाशिया
कविता
उतपति सांई तैं किया, प्रथम हि वो ऊंकार
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
उतपति सांई तैं किया, प्रथम हि वो ऊंकार।
तिसतें तीनौं गुन भये, सुन्दर सब बिस्तार॥
॥
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सुन्दर नारी पुरुष की, प्रीति परस्पर जांनि
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बंबई, थलहि समुद्र मैं, पानी सकल समात
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