सुंदर गुरु दीपक किये, घर मैं को तम जाइ।सद्गुरु सूर प्रकास तें, सबै अंधेरे बिलाइ॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
प्रात ही उठत सब पेट ही की चिंता सबसुंदरदासकविताप्रात ही उठत सब पेट ही की चिंता सबसुंदरदास२ मिनट का पाठ