साधो भवसागरमें काल, होरी खेलई॥भांति-भांति के रंग लिये कर करत जीवन की घात।बूढाबाला कछू न देखै देखै दिन नहिं रात॥निश्चय मौत लिये संग रानी नानारंग सम्हार।बडे अभिमानी नामी सोभी लीने मार॥सूर चंदवा भयते कांपे स्वर्ग माहिं सब देव।तनु धारी सबही थर्राने ज्ञानी जानत भेव॥आपन को देही नहिं माने जाने आतम सांच।चरण दास कहै सहजो बाई ताहिन आवै आंच॥

साधो भवसागरमें काल, होरी खेलई
सहजोबाईपद · लगभग २ मिनट