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हाशिया
कविता
धन्ना कहै धन बांटिए, ज्यूं कूवा का नीर
धन्ना भगत
दोहा · लगभग २ मिनट
धन्ना कहै धन बांटिए, ज्यूं कूवा का नीर।
खाटी सापुरसां तणी, सब काहू का सीर॥
॥
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धन्ना धन नहिं राचिये, न रचिये संसार
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