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सतगुरु साँचा सूरिवाँ, सबद जु बाह्या एक

साखी · लगभग २ मिनट
सतगुरु साँचा सूरिवाँ, सबद जु बाह्या एक।लागत ही मैं मिल गया, पड्या कलेजै छेक॥७॥

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