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रहिमन रिस तैं तजत नहिं, बड़े प्रीति की पौरि

दोहा · लगभग २ मिनट
रहिमन रिस तैं तजत नहिं, बड़े प्रीति की पौरि।मूकन मारत आवई, नींद बिचारी दौरि॥१६४॥

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