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सुन्दर संमरथ राम की, मो पै कही न जाइ

दोहा · लगभग २ मिनट
सुन्दर संमरथ राम की, मो पै कही न जाइ।पलही मैं जल थल भरै, पल मैं धूरि उड़ाइ॥

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