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हाशिया
कविता
सुन्दर तृष्णा लै गई, जहँ बन बिषम पहार
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
सुन्दर तृष्णा लै गई, जहँ बन बिषम पहार।
सिंह ब्याघ्र मारै तहां, कै मारै बटमार॥
॥
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काष्ट सु जोरे जुगत करि, कीया रथ आकार
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घूघू कउवा रासिभा, ये जब बोलहिं आइ
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