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बाप! आपने करत मेरी घनी घटि गई

पद · लगभग २ मिनट
बाप! आपने करत मेरी घनी घटि गई।लालची लबारकी सुधारिये बारक, बलि,रावरी भलाई सबहीकी भली भई ॥ १ ॥रोगबस तनु, कुमनोरथ मलिन मनु,पर-अपबाद मिथ्या-बाद बानी हई।साधनकी ऐसी बिधि, साधन बिना न सिधि,बिगरी बनावै कृपानिधिकी कृपा नई ॥ २ ॥पतित-पावन, हित आरत-अनाथनिको,निराधारको अधार, दीनबंधु, दई।इन्हमें न एकौ भयो, बूझि न जूझ्यो न जयो,ताहिते त्रिताप-तयो, लुनियत बई ॥ ३ ॥स्वाँग सूधो साधुको, कुचालि कलितें अधिक,परलोक फीकी मति, लोक-रंग-रई।बड़े कुसमाज राज! आजुलौं जो पाये दिन,महाराज! केहू भाँति नाम-ओट लईः ॥ ४ ॥राम! नामको प्रताप जानियत नीके आप,मोको गति दूसरी न बिधि निरमई।खीझिबे लायक करतब कोटि कोटि कटु,रीझिबे लायक तुलसीकी निलजई ॥ ५ ॥

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