गम्य अगम्य असंखि अचित उपाधि मिल्यौ निरुपाधि कहावै।निरव्वधि है निरवान सदा यह एसौ प्रतछ्छ गहै न गहावै।कला बिनु है रु कला सब वाहि मैं है निरवैव अवैव बनावै।आप अनंत अखंड अपार सु ऐसौ सरीर में कैसैं कै आवै॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
बहुर्यौ कहत गुरु सिष्य यह ऐसैं जानिजसवंत सिंहकविताबहुर्यौ कहत गुरु सिष्य यह ऐसैं जानिजसवंत सिंह२ मिनट का पाठ
सास्त्र मैं तो सब ठौर कह्यौ है अबिद्या बिषेंजसवंत सिंहकवितासास्त्र मैं तो सब ठौर कह्यौ है अबिद्या बिषेंजसवंत सिंह२ मिनट का पाठ