पुनः त्रिविध नायिका-भेद · उत्तमा लखि अपराध नयकवा, नहिं रिस कीन्ह।बिहँसत चँदन-चउकिया, बैठन दीन॥९२॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+