कुल खोयां कुल ऊबरै, कुल राख्याँ कुल जाइ।राम निकुल कुल मेंटि लै, सब कुल रह्या समाइ॥४५॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
सुरति सिमृति दुई कन्नी मंदा परमिति बाहर खिंथाकबीरकवितासुरति सिमृति दुई कन्नी मंदा परमिति बाहर खिंथाकबीर२ मिनट का पाठ