मैं मैं करत सबै जग जावै, अज हूँ अंध न चेतै रे।यहु दुनिया सब देख दिखानी, भूलि गये हैं केते रे॥मैं मेरे में भूलि रहे रे, साजन सोई बिसारा।आया हीरा हाथि अमोलिक, जनम जुवा ज्यूँ हारा॥लालच लोभैं लागि रहे हे, जानत मेरी मेरा।आपहि आप बिचारत नाहीं, तूँ काको को तेरा॥आवत है सब जाता दीसै, इन में तेरे नाहीं।इन सौं लागि जनम जिन खोवै, सोधि देखु सचु माहीं॥निहचल सौं मन मानै मेरा, सोई सों बनि आई।दादू एक तुम्हारा साजन, जिन यहु भुरकी लाई॥

