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राजी समझि राह गति येही

पद · लगभग २ मिनट
राजी समझि राह गति येही॥मुलाँ कर ल्यौ न्याव खुदाई, इहि बिधि जीव का भरम न जाई॥ टेक॥सरजी आँनैं देह बिनासै, माटी बिसमल कींता।जोति सरूपी हाथि न आया, कहौ हलाल क्या कीता॥बेद कतेब कहौ क्यूँ झूठा, झूठा जोनि बिचारै।सब घटि एक एक करि जाँनैं, भौं दूजा करि मारै॥कुकड़ी मारै बकरी मारै, हक हक हक करि बोलै।सबै जीव साईं के प्यारे, उबरहुगे किस बोलै॥दिल नहीं पाक पाक नहीं चीन्हाँ, उसदा षोजन जाँनाँ।कहै कबीर भिसति छिटकाई, दोजग ही मन माँनाँ॥62॥

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