जग सूं प्रीति करे जिनि कोइ।हंस मूवौ कउवा संगि होई॥कनक कामनी विषफल योई।जिहिं देख्या विष व्यापै सोई॥खाए ते तन कौ होइ नास।इनका संग तजै सोइ दास॥अहनिस रहै एक सूँ लीन।जैसे पानी माँही मीन॥तबसंताप व्यापै नहिं कोई।निहचै सब सुख पावै सोइ॥जन तुरसी ऐसा जन कोई।राम नाम जपि निरभै होइ॥उनमन ताली रहै लगाइ।आपा तजि हरि माहि समाइ॥


