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मन बनिजारा रे भाई

सबद · लगभग २ मिनट
मन बनिजारा रे भाई।दिना दस ब्यौपार करि ले, गुरु ग्यांन लै साईं॥नर नारायण देह, पूरब पुनि ते पाई।भजन बिना पछिताइगौ, जब समै चलि जाई॥संसार सहर बाजार मांहीं, तू भूलि मति जाई।धकाधकी तहँ पाइये, हरि नांव बिसराई॥जा कारनि दहु करम करते, रेणि दिन ध्याई।सगि न कोई चालि है, जम पकरि ले जाई॥समझ सौंज सवारि अपनी, रैणि पडि जाई।पंच चोर महाबली, तोहिं हरहिंगे आई॥चेतन पहरै जागि निस दिन, सोई मति जाई।यहु औसर बहोरि न, तोहि कहू समझाई॥ब्रह्म वस्त विसाहि कै हम लादि चल ले भाई।जन तुरसी बनिजारिया, जन ठेटि पहुँचाई॥

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