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उपजै बिनसै जगत सब, सुख-दुख बहु संताप

दोहा · लगभग २ मिनट
उपजै बिनसै जगत सब, सुख-दुख बहु संताप।सुन्दर करि न्यारा रहै, ऐसा समरथ आप॥

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