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हाशिया
कविता
उपजै बिनसै जगत सब, सुख-दुख बहु संताप
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
उपजै बिनसै जगत सब, सुख-दुख बहु संताप।
सुन्दर करि न्यारा रहै, ऐसा समरथ आप॥
॥
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राम नाम पीयूष तजि, बिष पीवै मति हीन
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बहुतक दिन बिछुरें भये, प्रीतम प्रान अधार
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