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श्री विट्ठल प्रगटे ब्रजनाथ

पद · लगभग २ मिनट
श्री विट्ठल प्रगटे ब्रजनाथ।नंद नंदन कलियुग में आए, निज जन किए सनाथ॥तब असुरनि कौ नास कियौ हरि, अब माया-मत नासै।तब गोपीजन कौं सुख दीनौ, अब निज भक्तनि पासै॥तब कै वेद पथ छाड़ि रास मिस, नाना भांति बताये।अब कै स्त्री सूद्रादिक कौं ब्रह्म-संबंध कराये॥इहि विविध प्रगट करी ब्रज लीला, श्री वल्लभ राजदुलारे।छीतस्वामी गिरिधन श्री विट्ठल, इन कौं वेद पुकारे॥

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