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बिंदु ते जिन पिंड किया अगनि कुछ रहाइया

पद · लगभग २ मिनट
बिंदु ते जिन पिंड किया अगनि कुछ रहाइया।दस मास माता उदरि राख्या बहुरि लागी माइया॥प्रानी काहै को लोभि लागै रतन जनम खोया।पूरब जनम करम भूमि बीजु नाहीं बायो॥बारिक ते बिरध भया होना सो हाया।जा जम आइ झोट पकरै तबहि काहे रोया॥जीवन की आसा करै जम निहारै सासा।बाजीगरी संसार कबीरा चेति ढालि पासा॥152॥

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