प्रगट वंदन रसना जु प्रगट, अरु प्रगट नाम रढ़ि।जीभ निसेनी मुक्ति तिहि बल, आरोहि मृढ़ चढ़ि॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+