गणिका-कलहान्तरिता जेहि दीन्हे बहु बेरिया, मोहिं मनि-माल।तेहते रूठेउँ सखिआ, फिरि गौ लाल॥५४॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+