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किनहीं बनज्या कांसा तांबा किनही लोग सुपारी

पद · लगभग २ मिनट
किनहीं बनज्या कांसा तांबा किनही लोग सुपारी।संतहु बनज्या नाम गोबिंद का ऐसी खेप हमारी॥हरि के नाम व्यापारी।हीरा हाथ चढ़ा निर्मोलक छूटि गई संसारी॥साँचे लाए तो संच लागे सांचे के ब्योपारी॥सांची वस्तु के भार चलाए पहुँचे जाइ भंडारी॥आपहि रतन जवाहर मानिक आपै है पासारी॥आपै ह्नै दस दिसि आप चलावै निहचल है ब्यापारी॥मन करि बैल सुरति करि पेडा ज्ञान गोनि भरी डारी।कहत कबीर सुनहु रे संतहु निबही खेप हमारी॥44॥

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