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राधे रूप निधान गुन आगरी

पद · लगभग २ मिनट
राधे रूप निधान गुन आगरी, नंद नंदन रसिक संग खेली,कुंज के सदन अति चतुर वर नागरी,चतुर नागर सौं करति केली।नील पट तन लसै, पीत कंचुकी कसै,सकल अंग भुवन में निरूप रेली॥परम आनंद सौं लाल गिरिधारी,हृदै सौ लागि-लागि भुजहि करिमेली।सहचरी मुदित सब जाय रंध्रनि निरखि,मानौ अपनौ भाग करत केलि॥

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