गांइनि सौ रति गोकुल सौं रति, गोवर्धन सौं प्रीति निवाई।श्री गोपाल चरन सेवारत, गोप सखा सब अमित अथाई॥गो-बानी जु वेद की कहियतु, श्री भागवत भलै अवगाही।छीतस्वामी गिरिधन श्री विट्ठल, गांइनि की खुर-रेनु सराही॥

गांइनि सौ रति गोकुल सौं रति
छीतस्वामीपद · लगभग २ मिनट