मन लागा उन मन्न सौं, गगन पहुँचा जाइ।देख्या चंद बिहूँणां, चांदिणाँ, तहाँ अलख निरंजन राइ॥१५॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
सुन्न संध्या तेरी देव देवा करि अधपति आदि समाईकबीरकवितासुन्न संध्या तेरी देव देवा करि अधपति आदि समाईकबीर२ मिनट का पाठ