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कहि न सकत रसना कछुक, प्रेम-स्वाद आनंद

दोहा · लगभग २ मिनट
कहि न सकत रसना कछुक, प्रेम-स्वाद आनंद।को जानै ‘ध्रुव’ प्रेम-रस, बिन बृंदावन-चंद॥

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