गुन ते लेत रहीम जन, सलिल कूप ते काढ़ि।कूपहुँ ते कहुँ होत हैं, मन काहू के बाढ़ि॥४६॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
चूल्हा दीन्हो बारि, नातो रह्यो सो जरि गयोरहीमकविताचूल्हा दीन्हो बारि, नातो रह्यो सो जरि गयोरहीम२ मिनट का पाठ