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महरि तिहारे पायँ परौं, अपनो ब्रज लीजै

पद · लगभग २ मिनट
महरि तिहारे पायँ परौं, अपनो ब्रज लीजै।सहि देख्यो, तुम सों कह्मो, अब नाकहिं आई, कौन दिनहिं दिन छीजै ।। 1 ।।ग्वालिनि तौ गोरस सुखी, ता बिनु क्यों जीजै।सुत समेत पाउँ धारि, आपुहि भवन मेरे, देखिये जो न पतीजै ।। 2 ।।अति अनीति नीकी नहीं, अजहूँ सिख दीजै।तुलसिदास प्रभु सों कहै उर लाइ जसोमति, ऐसी बलि कबहूँ नहिं कीजै ।। 3 ।।

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