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हस्ती छूटा मन फिरै, क्यूँ ही बंध्या न जाइ

दोहा · लगभग २ मिनट
हस्ती छूटा मन फिरै, क्यूँ ही बंध्या न जाइ।बहुत महावत पचि गये, दादू कछू न बसाइ॥

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