प्यारे जू की जीवन है नवल किशोरी गोरी,तैसी भांति प्यारी जू की जीवनि बिहारी है।जोई-जोई भावै उन्हैं सोई-सोई रुचै इन्हैं,एकै गति भई ऐसी रंच को न न्यारी है॥छिन-छिन देखि-देखि छबि की तरंग नाना,प्रीतम दुहूँनि सुधि देह की बिसारी है।हित ध्रुव रीझि-रीझि रहै रति रस भीजि,प्रीति ऐसी अब लगि सुनी न निहारी है॥

प्यारे जू की जीवन है नवल किशोरी गोरी
ध्रुवदासकवित्त · लगभग २ मिनट