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काहे कौं परिश्रम करै, जिनि भटकै चहूँ ओर

दोहा · लगभग २ मिनट
काहे कौं परिश्रम करै, जिनि भटकै चहूँ ओर।घर बैठैं ही आइ है, सुंदर सांझ कि भोर॥

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