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हाशिया
कविता
जो यह देखै क्रूर ह्वै, तौ वह होत कृतांत
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
जो यह देखै क्रूर ह्वै, तौ वह होत कृतांत।
सुंदर जौ यह साधु ह्वै, तौ आगै है सांत॥
॥
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जब दस बीस पचास सौ, सहस्य लाख पुनि कोरि
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दृष्टि न फेरै नैंकहूं, नैंन लगै गोबिंद
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