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लाज न लागत दास कहावत

पद · लगभग २ मिनट
लाज न लागत दास कहावत।सो आचरन बिसारि सोच तजि, जो हरि तुम कहँ भावत ॥ १ ॥सकल संग तजि भजत जाहि मुनि, जप तप जाग बनावत।मो-सम मंद महाखल पाँवर, कौन जतन तेहि पावत ॥ २ ॥हरि निरमल, मलग्रसित हृदय, असमंजस मोहि जनावत।जेहि सर काक कंक बक सूकर, क्यों मराल तहँ आवत ॥ ३ ॥जाकी सरन जाइ कोबिद दारुन त्रयताप बुझावत।तहूँ गये मद मोह लोभ अति, सरगहुँ मिटत न सावत ॥ ४ ॥भव-सरिता कहँ नाउ संत, यह कहि औरनि समुझावत।हौं तिनसों हरि! परम बैर करि , तुम सों भलो मनावत ॥ ५ ॥नाहिंन और ठौर मो कहँ, ताते हठि नातो लावत।राखु सरन उदार-चूड़ामनि! तुलसिदास गुन गावत ॥ ६ ॥

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