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कबीर देख्या एक अंग,महिम कही न जाइ

साखी · लगभग २ मिनट
कबीर देख्या एक अंग, महिम कही न जाइ।तेज पुंज पारस धरणीं, नैनू रहा समाइ॥३८॥

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